मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। जलभराव, गंदा पानी और नमी वाला मौसम मच्छरों और बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल परिस्थिति बनाता है। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हर साल बारिश के दौरान अस्पतालों में मरीज़ों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है। 1. डेंगू और मलेरिया बारिश के बाद जगह-जगह जमा हुआ साफ पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन जाता है। डेंगू और मलेरिया दोनों ही मच्छरों के काटने से फैलते हैं। तेज़ बुखार, शरीर में दर्द, और प्लेटलेट्स कम होना इसके मुख्य लक्षण हैं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। 2. टाइफाइड दूषित पानी और खाना खाने से टाइफाइड होता है। तेज़ बुखार, कमज़ोरी और पेट दर्द इसके लक्षण हैं। बारिश के मौसम में हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया पानी ही पिएं, और बाहर का खुला खाना खाने से बचें। 3. वायरल फीवर और सर्दी-जुकाम मौसम में अचानक बदलाव की वजह से वायरल इंफेक्शन तेज़ी से फैलता है। बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द आम लक्षण हैं। भीगने के तुरंत बाद गीले कपड़े बदलें और गुनगुना पानी पिएं। 4. पेट संबंधी बीमारियां (डायरिया, फूड पॉइज़निंग) गंदा पानी और सड़क किनारे का खाना पेट की बीमारियों की सबसे बड़ी वजह है। हाथ धोकर ही खाना खाएं और सड़क किनारे कटे हुए फल या चाट खाने से परहेज़ करें। 5. स्किन इंफेक्शन लगातार नमी और गीले कपड़ों की वजह से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बारिश में भीगने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं और सूती कपड़े पहनें। बचाव के लिए ज़रूरी बातें घर के आसपास पानी जमा न होने दें पानी उबालकर या फिल्टर करके पिएं बाहर का खुला खाना खाने